नाम जयराम रमेश काम रावण का
नाम जयराम रमेश काम रावण का
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गीताप्रेस गोरखपुर जैसी राष्ट्र,सनातन और समाज हेतु कृतसंकल्पित संस्था(प्रेस) जिनके लिये केवल नरसेवा नारायण सेवा ही सबकुछ है ,,,,,जिन्होंने वर्तमान महँगे युग मे भी जिसमे छपाई की राशि भी उन्हें नही मिल पाती ऐसे में भी न्यूनतम राशि मे समाज को सनातनी साहित्य ही नही अपितु मानवोपकार और समाज उत्थान के अनेकानेक साहित्य उपलब्ध कराए है और कराते है के विषय में गीताप्रेस को "गांधी शांति सम्मान" मिलने पर जयराम नरेश नामक दुर्बुद्धि द्वारा इसे गोडसे और सावरकर का सम्मान कहना न केवल गीताप्रेस का अपमान है अपितु सकल सनातन समाज,हिन्दू समाज और प्रत्येक वह व्यक्ति जो आज गीताप्रेस के संस्कारों से पल्लवित हुआ है और अगली पीढ़ी में इसे हस्तांतरित कर पा रहा है का अपमान है |
मैं स्वयं गीताप्रेस के "कल्याण" अंक का नियमित पाठक हूँ | मेरा सुपुत्र आरव जब रात्रि में मुझे कहानी सुनाने कहता है तो इन्ही अंकों के श्रेष्ठ कहानियाँ और सत्यकथा उसे सुनाकर मैं उसे संस्कार जल से सींचने का कार्य करता हूं मैं ही नही करोड़ो मानवों के घर पूजाकक्ष,पठन कक्ष,दफ्तर में आज गीताप्रेस की पुस्तकें अपने पवित्रता से अपने ज्ञान आलोक से वहाँ समाज उद्धार कर रही है,,...समझ से परे है कि आखिर कांग्रेस ऐसे हिन्दू द्रोहियों को पार्टी में रखे हुए क्यों है,,गीताप्रेस का अपमान हिन्दू जनमन की भावनाओ का अपमान है,,,अरबो साहित्यप्रेमियों के लिए यह अपने मूल को जानने का आधार उपलब्ध कराता है जयराम रमेश आप नाम से तो रमेश और राम है पर आपका यह कृत्य रावण वाला ही है,,,,हिन्दू होकर अपने ही धर्म प्रचारक संस्था के विषय मे ऐसे पशुवत बयान घोर आपकी वामपंथी और हिन्दुविरोधी लिजलिजी सोंच को दर्शाता है,,,,आप जैसे लोग ही काफी है अपने पार्टी को रसातल में ले जाने के लिए,,,मैं निवेदन करता हूँ इस कथित मनुष्य का(क्योंकि बयान तो पशुवाले है)का अधिकाधिक विरोध करें |
सुनील शर्मा नील
छत्तीसगढ़
8839740208