मौसम के चाल -3(मनहरण घनाक्षरी)
मौसम के चाल
गरमी मा पानी गिरै, शीत मा पसीना चुहै,
आय-बाय होगे हावै, मौसम के चाल हा |
कम्बल ला ओढ़-ओढ़, कूलर चलाय सब
तात-तात लागत हे, सरद मा गाल हा |
बाढ़ आत कोनो जगा, कोनो जगा परे सुक्खा
बिगड़े हे मनखे के, देह के जी ताल हा |
काट-काट जंगल ला ,शहर बनात हवै
तभो पछतात कहाँ, धरती के लाल हा ||
सुनिल शर्मा नील