आज के युवा

आज के युवा
मनहरण घनाक्षरी छत्तीसगढ़ी -1


चून्दी मा रँगाय रंग, घुमत हे मतिमंद
पीयत शराब गाँजा, टूरी-टूरा आज के |

कखरो तो छपरी हे, कखरो हे रेल ट्रैक
कखरो कटिंग हवै, कुकरा के ताज के |

नान- नान कपड़ा ला, पहिर देखाय अंग
शरम ला बेंच खाय, लोक के न लाज के |

दिनभर कुरिया मा, कोचकय मोबाइल 
अन्न के ये दुसमन, काम के ना काज के | |

सुनिल शर्मा

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