संस्मरण अपन अपन होथे नवा घर कहिथे बनाके देख अउ बिहाव कहिथे करके देख | ये गोठ ला सियान मन कहे हे तेन कतका सही हे अपन अनुभव ले जाने बर मिलिस |नवा घर जब जनवरी दू हजार बाइस(जनवरी 2022मा बनवाएव) ता कब खर्चा हा 20 लाख ले बाढ़त-बाढ़त 30 लाख पहुँचगे पता नई चलिस |एक बेर बनवाना हे इहु कर लेथन उहु लगवा लेतेन करत-करत कब घर के खर्चा बाढ़गे पता नई चलिस कर्जा मूड़ी मा चढ़गे रहिसे | रोज रतिहा जब सोवव ता कर्जा के आंकड़ा मन लेनदार मन आँखी मा झूलय |का करहू कइसे करहू अइसन लगे | लइका कतको बड़ हो जावय दाई बाबू बर सदा नान्हे अउ मयारू रहिथे |मैं घर के चार भाई मन मा सबले नान्हे आवव मोर मया कतका होही समझ सकत होहू |जब भी थक जथँव माँ के कोरा मा जाके सुत जथव |अइसे लगथे जइसे अब सब सुग्घर हो जाहि |एकदिन जाके माँ होरा खावत बरवट मा बइठे रहय मैं जाके ओखर कोरा मा मूड़ी रखके ढलँग गेंव |फेर दाई-दाई होथे मोर चिंता भरे मुह ला देखके समझगे बिन बोले सबगोठ ला जनामना जानगे मोर मुहू ला देखके पूछिस-कस बेटा का सोंचत हस ,अड़बड़ चिंता मा दिखत हस बेटा | मैं कहेव माँ एकझन लागादार के पैसा लागत हव |मोला तगादा के आदत नइहे माँ |इस्कूल के ...