करो जयकार दशरथ नंदन की

अखिल ब्रम्हांड के माथे सुशोभित तिलक चंदन की |
आसुरी शक्तियों के काल उनके आर्त क्रंदन की |
सिखाया मातृभूमि से बड़ी कोई नही जिनने    |

करो जयकार मिलकर आप उस दशरथ के नंदन की ||

सुनिल शर्मा "नील"

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