कथा1 -बड़ो का अपमान पतन का कारक है
कहानी-1
स्रोत-कल्याण अगस्त 2018
वृत्तासुर के वध के बाद इंद्रदेव को ब्रम्हहत्या का पाप लगा | पाप से डरकर वह एक सरोवर में छुप गया |देवताओं के ढूंढने पर वे चिंतित हुए | स्वर्ग की व्यवस्था कैसे सम्हाली जाए यह सोंचकर राजा नहुष को देवताओं ने बृहस्पति की सलाह से राजा बना दिया |कामातुर नहुष मदान्ध होकर देवताओं की कन्या अप्सराओं संग भांति2 की क्रीड़ाओं में व्यस्त हो गया और तो हर एकदिन उसने इंद्र की पत्नी शचीदेवी पर गलत निगाह डाली|पतिव्रत धर्म भंग होने डर से शची ने देवगुरु के आदेश से देवदूत को नहुष के पास भेजा और कहा अगर नहुष ऐसी पालकी पर आए जिसे सप्तऋषि ढोंये तो मैं तैयार हूं|
कामातुर नहुश ने सप्तऋषियों से पालकी उठवाई सप्तऋषि कीड़े मकोड़े न् पैर के नीचे आ जाये इसलिए धीरे चल रहे थे |आतुरता में नहुष उन्हें शीघ्र चलने कहता पर ऋषि अपनी धुन में रहते,,,गुस्से से आकर नहुश ने सर्प सर्प कहकर पैर पटका तो वह पैर अगतस्त ऋषि को लग गया| क्रोध में आकर नहुश को उन्होंने शाप दे दिया तू मदान्ध होकर बड़ो का मान भूल गया है जा पृथ्वी पर सर्प बन जाए नहुश अजगर बनकर पृथ्वी पर जा गिरा |