कथा 3- कल की चिंता क्यों
*♨️प्रेरक प्रसंग♨️*
*!! कल की चिंता !!*
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एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था। राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार कर उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा दिया। राजा ने सोचा कि एक संन्यासी ही राजकुमारी की भावनाओं की कद्र कर सकता है।
विवाह के बाद राजकुमारी खुशी-खुशी संन्यासी की कुटिया में रहने आ गई। कुटिया की सफाई करते समय राजकुमारी को एक बर्तन में दो सूखी रोटियां दिखाई दीं। उसने अपने संन्यासी पति से पूछा कि रोटियाँ यहाँ क्यों रखी हैं? संन्यासी ने जवाब दिया कि ये रोटियां कल के लिए रखी हैं, अगर कल खाना नहीं मिला तो हम एक-एक रोटी खा लेंगे। संन्यासी का ये जवाब सुनकर राजकुमारी हंस पड़ी। राजकुमारी ने कहा कि मेरे पिता ने मेरा विवाह आपके साथ इसलिए किया था, क्योंकि उन्हें ये लगता है कि आप भी मेरी ही तरह वैरागी हैं, आप तो केवल भक्ति करते हैं और कल की चिंता करते हैं।
सच्चा भक्त वही है जो कल की चिंता नहीं करता और भगवान पर पूरा विश्वास रखता है। अगले दिन की चिंता तो जानवर भी नहीं करते हैं, हम तो इंसान हैं। अगर भगवान् ने चाहा तो हमें खाना मिल जायेगा और नहीं मिला तो रातभर आनंद से प्रार्थना करेंगे।
ये बातें सुनकर संन्यासी की आंखें खुल गई। उसे समझ आ गया कि उसकी पत्नी ही असली संन्यासी है। उसने राजकुमारी से कहा कि आप तो राजा की बेटी हैं, राजमहल छोड़कर मेरी छोटी सी कुटिया में आई हैं, जब कि मैं तो पहले से ही एक फकीर हूं, फिर भी मुझे कल की चिंता सता रही थी। केवल कहने से ही कोई संन्यासी नहीं होता; संन्यास को जीवन में उतारना पड़ता है। आपने मुझे वैराग्य का महत्व समझा दिया।
*शिक्षा:-*
अगर हम भगवान् की भक्ति करते हैं तो विश्वास भी होना चाहिए कि भगवान् हर समय हमारे साथ हैं। उन्हें हमारी चिंता हमसे ज्यादा रहती हैं। कभी आप बहुत परेशान हों, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा हो तब आँखें बंद करके विश्वास के साथ पुकारें! सच मानिये; थोड़ी देर में आपकी समस्या का समाधान मिल जायेगा..!!
*सदैव प्रसन्न रहिये।जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है; उसके पास समस्त है।*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️🙏🌹🌺🌸🪴🪷🌷🌻🦜