मुक्तक- रुके न् संकटो में

बहुत पुरुषार्थ के पश्चात ऐसा तौर पाता है |
सफर में कष्ट सहकर ही मुसाफिर ठौर पाता है| 
बिना संघर्ष के होती नही जय मान लो तुम भी।
रुके न सकंटो में जो सुखद वो दौर पाता है ||